आर्द्रा नक्षत्र क्या है? 

यह आकाश मंडल का छठवां नक्षत्र है। आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी ग्रह राहु है, और इस नक्षत्र के देवता  रूद्र है, रूद्र शिव का ही एक नाम है,  और इस नक्षत्र के राशि स्वामी बुध होते है। अब क्योंकि ये नक्षत्र मिथुन राशि में सम्मलित है। आर्द्रा नक्षत्र मिथुन राशि में 6 डिग्री 40 मिनट से 20 डिग्री तक रहता है। इस नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह आंसू की बूंद को माना गया, आद्रा का अर्थ होता है नमी अर्थात शीलन।आर्दा नक्षत्र का स्वामित्व  राहु के पास होने के कारण इन जातकों में राहु ग्रह से जुड़े बहुत से लक्षण और गुण देखने को मिलते हैं और इस नक्षत्र का  पूरा समावेश मिथुन राशि के अंदर आता है और मिथुन राशि के स्वामी बुध देव है इस कारण इस नक्षत्र के लोगों में बुध का प्रभाव भी देखने को मिलता है।


जून माह के तीसरे सप्ताह में प्रात:काल में आर्द्रा नक्षत्र का उदय होता है। फरवरी माह में रात्रि 9 बजे से 11 बजे के बीच यह नक्षत्र आसमान के बीचोबीच होता है।  निरायण सूर्य 21 जून को आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है।

यह नक्षत्र हरे रंग को संबोधित करता है, आर्द्रा नक्षत्र का वृक्ष पाकड है।

आर्द्रा मे जन्मे जातक का स्वभाव 

आर्द्रा नक्षत्र का जातक मोटे और पतले दोनों तरह की काया के हो सकते हैं। छरहरे और स्थूल डील डौल के हो सकते हैं। नेत्र आकर्षक व ऊंची नाक भी हो सकती है। आर्द्रा नक्षत्र के जातक का स्वभाव चंचल, हँसमुख, अभिमानी तथा विनोदी स्वभाव का होते हैं। इनके पास बहुत तार्किक दिमाग होता है, किसी भी सवाल का जबाब इनके पास होता है, कभी कभी लोग इन्हें मुँहफट भी कहते हैं क्योंकि कभी कभी ऐसे बातें बोल जाते हैं जिसे नहीं बोलना चाहिए था, बाद में उन्हें पछतावा भी होता है। वे अपने अनुभव और एहसास को जाहिर कर देते हैं। इनसे अंदर ज्यादा कुछ छुपा नहीं रहता। यह बुरे विचारों वाले तथा व्यसनी भी होते हैं। आर्द्रा नक्षत्र वाले जातक को राहु की स्थिति अनुसार भी फल मिलता है। यह सदा स्वयं को सही मानते हैं। इनमें आक्रामकता अधिक होती है। स्त्री के प्रति दोयम दर्जे का व्यवहार रखते हैं। यह अन्य लोगों की अनुशासनहीनता देखकर चिन्तामग्न रहते हैं। दूसरों की चिन्ता में परेशान रहते हैं।इनका स्वर कड़क तथा विद्रोही होता है, इन्हें अत्यधिक क्रोध आता है। इनमें काम वासना भी प्रबल होती है।इस नक्षत्र के जातकों में अहसानों को भूलने की आदत होती है। यह व्यक्ति के चरित्र के आधार पर ही उसका मूल्याँकन करते हैं।जरा सी कमी मिलते ही यह दुखी होकर पीछे हट जाते हैं। 

जातक का पारिवारिक जीवन

 इनके विवाह  मे देर से होता है। स्वभाव में कठोरता होती है, परिवार से संपत्ति को लेकर विवाद भी हो सकता है।दांपत्य जीवन में आपसी वाद-विवाद होता रहता है। परिवार से अलग रहने की संभावना भी बनती दिखाई देती है। जीवनभर भाग्य से संबंधित समस्याओं से उलझना पड़ता है। पर जातक अपनी समस्याओं को दूसरों को कम ही बताता है।जातक को विवाह पश्चात पूर्ण सम्मान ससुराल पक्ष से न मिल पाए ऐसा हो सकता है। वैवाहिक जीवन कष्ट भरा हो सकता है,संतान पक्ष की ओर से भी अधिक सुख नहीं मिल पाता है, विवाह में तलाक या अलगाव की स्थिति प्रभावित कर सकती है।

परंतु कभी कभी ये बहुत भाग्यशाली भी होते हैं, राहु की स्थिति अच्छी हो तो जातक अपने भाग्य से बहुत कुछ हासिल कर लेता है, लोग इनकी बुद्धि से बहुत प्रभावित होते हैं, अच्छे वक्ताओं मे गिने जाते हैं, अच्छा नाम कमाते हैं पर इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जल्दबाजी और शार्टकट से बचना चाहिए, अन्यथा पाया धन भी बर्बाद हो सकता है। 

आर्द्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाले का स्वास्थ्य

इस नक्षत्र के अधिकार में गला आता है, बाजुएँ आती है और कंधे आते हैं। इस नक्षत्र के पीड़ित होने पर इन अंगों से संबंधित बीमारी होने की संभावना बनती है। जातक कुछ असाध्य रोग भी प्रभावित कर सकते हैं। लकवा होना, हृदय अथवा दांत के रोग, रक्त संबंधी बीमारी हो सकती है। स्त्रियों को मुख्य रुप से मासिक से संबंधी दिक्कतें परेशान कर सकती हैं। पित्त दोष एवं कफ से संबंधी रोग प्रभावित करते हैं। दोनों नेत्र व मस्तक का आगे और पीछे का भाग आर्द्रा के अवयव में आते हैं। इस नक्षत्र का संबंध वायु दोष विकार से भी होता है। इन्हें बार बार सर्दी जुकाम या गले मे परेशानी हो सकती है। 

आर्द्रा नक्षत्र के जातक का कार्यक्षेत्र 

इस नक्षत्र में विभिन्न प्रकार के व्यवसाय और काम काज आते हैं। बिजली से संबंधी सामान एवं उससे जुड़े काम आर्द्रा नक्षत्र में आते हैं। इलैक्ट्रानिक व कम्प्यूटर से संबंधित कामों में आप अच्छा लाभ कमा सकते हैं। वाद्य उपकरण, विभिन्न भाषाओं का ज्ञान होना, फोटोग्राफी से संबंधित काम, कंप्यूटर डिज़ाइनर का कार्य भी इस नक्षत्र के अंतर्गत आता है। इस संबंध का दार्शनिकता एवं चिंतन से भी संबंध होता है। आप एक अच्छे चिकित्सक बन सकते हैं। दिमागी खेल जैसे शतरंज इत्यादि में भी आपको अच्छी रफ्तार मिल सकती है। मनोचिकित्सक, अन्वेषक, गुप्तचर विभाग से जुड़े कार्य, मादक पदार्थ, राजनैतिक षडयंत्र व घोटाले इत्यादि से संबंधित काम इस नक्षत्र में आते हैं। 

 आर्द्रा नक्षत्र के नामाक्षर

आर्द्रा नक्षत्र के प्रथम चरण में जो 06:40 से 10:00 तक होता है। इसका अक्षर “कु” होता है। इस समय जन्म लेने वाले जातक का नाम " कु" से रखना चाहिए। 

आर्द्रा नक्षत्र के दूसरे चरण यमें जो 10:00 से 13:20 तक होता है। इसका अक्षर “घ” होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्म लेने वाले लोगों के नाम "घ" से सुरू होने चाहिए। 

आर्द्रा नक्षत्र के तीसरे चरण में जो 13:20 से 16:40 तक होता है। इसका अक्षर “ङ” होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्म लेने वाले व्यक्ति का नाम "ङ" से होना चाहिए हालाँकि इस अक्षर से नाम खोजना बहुत ही कठिन है, परंतु यहां उच्चारण की दृष्टि से  अं+ग से संबंध रख कर नाम बनाया जा सकता है। 

आर्द्रा नक्षत्र के चौथे चरण में जो 16:40 से 20:00 तक होता है। इसका अक्षर “छ” होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के नाम "छ" से रखने चाहिए। 

आर्द्रा नक्षत्र की आराधना एवं वेद मंत्र

ॐ नमस्ते रूद्र मन्यवSउतोत इषवे नम: बाहुभ्यां मुतते नम: ।

 ऊं रुद्राय नम: ।

आर्द्रा नक्षत्र के जातक के लिए भगवान शिव की आराधना करना शुभदायक होता है। भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए। सोमवार का व्रत एवं जाप इत्यादि करना उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है। आर्द्रा नक्षत्र में चंद्रमा का गोचर होने पर भगवान शिव का भजन कीर्तन, नाम स्मरण करने से कार्यों में सफलता एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है।