मृगशिरा नक्षत्र 



आकाश मंडल में तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। प्राचीन आचार्यों ने हमारे आकाश मंडल को 28 नक्षत्र मंडलों में बांटा है। नक्षत्रों की जानकारी की इस सीरीज में इस बार जानिए पांचवां नक्षत्र मृगशिरा है ।मृगशिरा को अंग्रेजी में ओरियन कहते हैं। मृगशिरा का अर्थ है मृग का सिर का भाग । आकाश में यह हिरण के सिर के आकार का नजर आता है। आकाश मंडल में मृगशिरा नक्षत्र 5वां नक्षत्र है। यह सबसे महत्वपूर्ण नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र का वृक्ष खैर और बबूल का है। इसके देवता सोम और नक्षत्र स्वामी मंगल है। मृगशिरा नक्षत्र के पहले दो चरण वृषभ राशि में स्थित होते हैं और शेष 2 चरण मिथुन राशि में स्थित होते हैं, जिसके कारण इस नक्षत्र पर वृषभ राशि तथा इसके स्वामी ग्रह शुक्र एवं मिथुन राशि तथा इसके स्वामी ग्रह बुध का प्रभाव भी रहता है। इस तरह इस नक्षत्र में जन्मे जातक पर मंगल, बुध और शुक्र का प्रभाव जीवनभर बना रहता है।

मृगशिरा नक्षत्र नाम अक्षर 

प्रथम चरण  - वृषभ राशि का 23° 20′ – 26° 40′ भाग सूर्य ग्रह द्वारा

शासित होता है। इसे" वी" ध्वनि से संबोधित किया गया है, मृगशिरा नक्षत्र के इस चरण में जन्मे जातक के नाम के पहले अक्षर " V" या "वी" से सुरु होने चाहिये। 

द्वितीय चरण -  वृषभ राशि का 26° 40′ – 30° 00′ भाग बुध ग्रह द्वारा शासित किया जाता है। इसे ध्वनि " वो" शब्द से अंकित किया गया है, मृगशिरा नक्षत्र के इस चरण में जन्मे जातक का नाम "वो" से रखना चाहिए।

तृतीय चरण  - मिथुन राशि का 00° 00′ – 3° 20′ भाग शुक्र ग्रह द्वारा शासित होता है। इसे ध्वनि "का" से संबोधित किया जाता है, इस चरण में जन्म लेने वाले व्यक्ति का नाम" का " से रखना चाहिए। 

चौथा चरण - मिथुन राशि का 3° 20′ – 6° 40′ भाग मंगल ग्रह द्वारा शासित होता है। इसे ध्वनि " की" से संबोधित किया जाता है। इस नक्षत्र चरण में जन्म लेने वाले व्यक्ति का नाम की से होना चाहिए। 

मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातक का स्वभाव 

जातक के विशेष गुड़ -

 सशक्त व्यक्तित्व, तेज और बुद्धिमान, प्राकृतिक रूप से नेता, कार्य उन्मुख, मजाकिया, उत्सुक, नए ज्ञान की तलाश करता है, समझदार और संवेदनशील, उत्तम वस्त्रों व सामान का शौक़ीन, जीवन में कई सुख प्राप्त करता है, गायन, लेखन, वादन और बातचीत का शौक़ीन, रचनात्मक, अनेक विषयों पर स्पष्ट बोलने वाला, तर्क व बहसबाजी में आनंद लेने वाला, उत्साही, युवा, चतुर, उत्सुक, आशावान, तेजी से सीखने की क्षमता, मैत्रीपूर्ण, मज़ेदार, अनेक मित्र व प्रेम में रुझान, कामुक, कठोर परिश्रमी, संपन्न होता है। 

 मृगशिरा नक्षत्र में जातक की कमजोरियाँ- 

आवेशपूर्ण, चुलबुला, चंचल, निरंतर ध्यान की जरुरत, अनेक साझेदारियां, उत्तेजना की लालसा, वचनबद्धता न निभाने वाला, अधिक उत्तेजना द्वारा परेशानियाँ , आसानी से कामोत्तेजित, अस्त-व्यस्त, आलोचनात्मक, वार्तालाप में कष्टकारी, असहाय, संदिग्ध, असंतुलित, आलोचना के प्रति संवेदनशील

मृगशिरा नक्षत्र में जातक के कार्यक्षेत्र-

 कलाकार, गायक, संगीतकार, लेखक, कवि, चित्रकार, दार्शनिक, रत्न उद्योग, पृथ्वी से संबंधित उत्पाद या सामग्री, किसान, भूमि विकास, सर्वेक्षक, मानचित्रकार, यात्री, खोजकर्ता, भवन-निर्माण ठेकेदार, कल-पुर्जे या इलेक्ट्रॉनिक्स से संबंधित व्यवसाय, पशुचिकित्सा या पालतू पशुओं से संबंधित व्यवसाय; वेश-भूषा और वस्त्र उद्योग, बिक्री प्रतिनिधि; विज्ञापन; प्रसारणकर्ता, प्रशासन, दिव्यदृष्टा, ज्योतिषी, शिक्षक आदि कार्य मृगशिरा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के कार्य क्षेत्र मे जाना चाहिए। 

यह पवित्र स्थल श्री आदि नारायण पेरुमल मंदिर भारत में तमिलनाडु के एन्न्कन्न गाँव में कोरादाचेरी के निकट स्थित है| मृगशिरा नक्षत्र में पैदा हुए लोगों को अपने जीवनकाल में एक बार इस पवित्र मंदिर के दर्शन करके यहाँ पूजा-अर्चना अवश्य करनी चाहिए|