शनिदेव का ज्योतिष स्थान और कारक
शनि की संक्षिप्त जानकारी
शनि ग्रह सूर्य से छठा नंबर का और वृहस्पति के बाद दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। यह पृथ्वी से नौ गुना बड़ा है, शनि के 53 उपग्रह हैं जिनका नामकरण किया गया है। टाइटन शनि का सबसे बड़ा उपग्रह है जो बुध ग्रह से बहुत बड़ा है, यह एक मात्र ऐसा उपग्रह है जिसके पास अपना वायुमंडल है।
शनि के पास एक वलय है यह नौ मुख्य छल्लों और तीन असतत चाप से मिलकर बने हुए हैं, यह वलय के पत्थरों, मलबे और बर्फ के टुकड़ों से बने हुए है। शनि को गैस के दानव के रूप में वर्गीकृत किया गया है, इसकी सतह तरल हायड्रोजन का बना हुआ है, इसका घनत्व कम होने के कारण गैस जैसा व्यवहार करता है।
सूर्य से शनि की दूरी 1.4 अरब मीटर से भी अधिक है, यह पृथ्वी समय के अनुसार है।
ज्योतिष में स्थान
शनि को ज्योतिष में धीमे चलने वाले ग्रह मे लिया जाता है, इनकी शनि देव के रूप मे आराधना की जाती है,इन्हें सूर्य पुत्र भी कहा गया है। शनिदेव को शनिवार का दिन समर्पित है।भारत के हर शहरों मे शनि देव का मंदिर है पर एक प्रमुख मंदिर शनि शिग्नापुर मे है, जिसकी मान्यता बहुत अधिक है, देश विदेश से लोग शनि देव की पूजा और दर्शन के लिए यहां आते हैं, चमत्कारिक बात है कि यहां किसी के घर या दुकान मे दरवाजे नहीं होते और ताला भी नहीं लगाया जाता, कहा जाता है कि शनि देव के डर से यहां चोरी नहीं होती है। अगर आपके अंदर भी अभिलाषा जागे तो एक बार जाना चाहिए।
शनि देव न्याय के देवता माने जाते हैं, कर्मों के अनुसार फल प्रदान करना इनका कार्य है, लोग इनकी न्याय से भयभीत रहते हैं, क्योंकि अच्छे कार्यों का अच्छा और बुरा कर्म का बुरा फल भोगना तय है।शनि की साढ़ेसाती, और शनि की ढैया, माना जाता है कि जो आगे चलकर उसके साथ बड़े चरित्र घटता है।, इसकी चर्चा होगी।
शनि देव के मित्र ग्रह बुध, शुक्र, राहु और केतु है और शत्रु ग्रह सूर्य, चंद्र और मंगल हैं। पुष्य, अनुराधा और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र इनकी राशि मे ही आते हैं।
मकर राशि में उच्च के और मेष मे नीच के होते हैं।
जिस जातक के लग्न मे शनि देव हों तो शनि देव सदा शुभ फल देने वाले होते हैं, गरीब घर मे पैदा होने के बावजूद अपने कर्मों से महान बन जाते है।
कालपुरुष की कुंडली मे शनि देव की तीन दृष्टि होती है 3,7और 10वा घर। जिन घरों मे शुभ फल देते हैं वे घर 3,6 और 11 वा घर हैं। शनि की दृष्टि शुभ फल नहीं देती ऐसे मे देखा जा सकता है कि जहां शनि दृष्टिगत हो रहे हैं वहां मित्र ग्रह हैं या शत्रु ग्रह हैं।
शनि का कारक तत्व
भूमि के अंदर से निकलने वाले पूरे तत्व -कोयला , पेट्रोल, खनिज आदि पर शनि का कारकत्व है।इसके अलावा लोहे और पानी के कारखाने और लोहे से बनाए जाने वाले वस्तु , काले रंग और काले रंग की कपड़े या काले रंग का समान, न्यायाधीश, सफाई कर्मचारी, मजदूर, गरीब, भिकारी, आलस, कोर्ट कचहरी, कौवा, मृत्यु, चमड़ा, कारखाना, , सत्कर्म , धर्म, आयु, योगी, सन्यासी, दंडाधिकारी, प्लास्टिक का कारखाना और उससे बने वस्तुए, नीलम,काली तिल, उडद और उडद की दाल आदि पर शनि देव का नियंत्रण होता है।
शनि की साढ़ेसाती और ढैया
साढ़ेसाती से बचने का उपाय
शनि की ढैया
शनि देव 2.5 साल मे अपनी राशि बदलते है जो एक साथ तीन राशियों पर चलता है। इन्हीं तीनों राशि को मिलाकर साढ़ेसाती कहा जाता है, अगली राशि मे शनि देव ढैया के रूप मे प्रवेश करते हैं तो उसके पिछली राशि पर ढैया का शीर्ष पर होता है तथा पिछले राशि पैर पर होता है और उसके पिछले राशी को छोड़ देते हैं, इसके फल भी शनि की साढ़ेसाती जैसा ही फल देते हैं। ढैया के केंद्र मे चंद्रमा होता है जो मन का कारक माने गए हैं।

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