नक्षत्र किसे कहते हैं?
आपने बहुत सुना होगा कि मेरे ग्रह नक्षत्र अच्छे नहीं चल रहे हैं,बुरे बर्ताव को देखकर भी कहते हैं कि किस नक्षत्र में पैदा हुआ है आदि
तो निश्चित ही हमारे जीवन मे इन नक्षत्रों का बड़ा योगदान है
आइए जानते हैं
नक्षत्र ज्योतिष शब्द विशेष रूप से वैदिक ज्योतिष में चंद्र भाग का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार, राशि चक्र में कुल 360 डिग्री का समावेश हैं। जैसे कि पृथ्वी को एक बिन्दु मान लिया जाए तो पृथ्वी के चारो ओर आसमान में तारों का समुह मौजूद हैं उन्हें नक्षत्र नाम दिया गया है। चंद्रमा धरती के चारों ओर घूमकर हर नक्षत्र में परिभ्रमण करती है। इसमें विशेष रूप से 27 नक्षत्र-मंडल या नक्षत्र हैं। इस प्रकार, प्रत्येक नक्षत्र 13 डिग्री और 20 मिनट का होता है। इसके बाद प्रत्येक नक्षत्र को चरण या पाद में समान रूप से विभाजित किया जाता है, प्रत्येक नक्षत्र में 4 पाद होते हैं। ये सभी 27 नक्षत्र मिलकर राशि चक्र के 360 डिग्री के एक चक्र को पूरा करते हैं।
नक्षत्रों के नाम इस प्रकार हैं-
1. अश्विनी 2.भरणी 3.कृतिका 4. रोहिणी
5.मृगशिरा 6.आर्दा 7.पुनर्वसु, 8.पुष्य
9.आश्लेशा 10. मघा 11. पूर्वाफाल्गुनी 12. उत्तराफाल्गुनी
13.हस्त 14.चित्रा 15.स्वाति 16. विशाखा
17.अनुराध 18.ज्येष्ठा 19.मूल 20. पूर्वाशाढ़ा
21. अत्तराशाढ़ा 22.श्रवण 23.धनिष्ठा 24. शतिभिषा
25.पूर्वाभाद्रपद 26. उत्तरा भाद्रपद तथा 27वां रेवती नक्षत्र है।
इन 27 नक्षत्रों को भी तीन हिस्सों में बांटा गया है - शुभ नक्षत्र, मध्यम नक्षत्र और अशुभ नक्षत्र।
शुभ नक्षत्र
शुभ नक्षत्र वो होते हैं जिनमें किए गए सभी काम सिद्ध और सफल होते हैं। इनमें 15 नक्षत्रों को माना जाता है – रोहिणी, अश्विन, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, रेवती, श्रवण, स्वाति, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद, उत्तराषाढा, उत्तरा फाल्गुनी, घनिष्ठा, पुनर्वसु।
मध्यम नक्षत्र
मध्यम नक्षत्र के तहत वह नक्षत्र आते हैं जिसमें आम तौर पर कोई विशेष या बड़ा काम करना उचित नहीं, लेकिन सामान्य कामकाज के लिहाज से कोई नुकसान नहीं होता। इनमें जो नक्षत्र आते हैं वो हैं पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वाभाद्रपद, विशाखा, ज्येष्ठा, आर्द्रा, मूल और शतभिषा।
अशुभ नक्षत्र
अशुभ नक्षत्र में तो कभी कोई शुभ काम करना ही नहीं चाहिए। इसके हमेशा बुरे नतीजे होते हैं या कामकाज में बाधा जरूर आती है। इसके तहत जो नक्षत्र आते हैं वो हैं- भरणी, कृतिका, मघा और आश्लेषा हैं। ये नक्षत्र आम तौर पर बड़े और विध्वंसक कामकाज के लिए ठीक माने जाते हैं जैसे - कोई बिल्डिंग गिराना, कब्ज़े हटाना, आग लगाना, पहाड़ काटने के लिए विस्फोट करना या फिर कोई सैन्य या परमाणु परीक्षण करना आदि। लेकिन एक आम आदमी या जातक के लिए ये चारों ही नक्षत्र बेहद घातक और नुकसानदेह माने जाते है।
नौ ग्रहों को निम्न नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है -
सूर्य:- कार्तिक, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
चन्द्र:- रोहिणी, हस्त, श्रवण।
मंगल:- मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा।
बुध:- आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती।
बृहस्पति:- पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद।
शुक्र:- भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा।
शनि:- पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद।
राहु:- आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा।
केतु:- आश्विन, मघा, मूल।
विभिन्न नक्षत्रों में जन्म लिए जातकों पर राशि और ग्रह के प्रभावों के साथ नक्षत्रों के प्रभाव को भी देखा जाता है, जिस नक्षत्र में जातक जन्मा हो उसका पता चलने पर उसके भविष्य की व्याख्या किया जा सकता है।
आगे के लेख में हम जानेंगे की 27 नक्षत्रों के स्वभाव से जीवन पर इसका क्या असर पड़ेगा।

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