बुध का ज्योतिष मे स्थान और कारक

बुध का संक्षिप्त परिचय 

बुध एक सुंदर ग्रह है, यह सूर्य से सबसे करीब का ग्रह है, बुध पर वायूमंडल नहीं है ।सूर्य का एक चक्कर 87 दिन 23 घंटे मे पूरा कर लेता है। पारा का व्यास 4879 किमी है जो धरती के उपग्रह चंद्र के आकार के समान ही है, सूर्य के लगभग होने के कारण, इसकी गति तेज है। पृथ्वी का एक दिन बुध के 90 दिन के बराबर होता है ।। 
बुध का एक दिन 16 मिनट के बराबर होता है, बुध के समय के हिसाब से, बुध का एक साल 7916.25 दिन का होता है, बुध के दिन की गणना से।
 

बुध सुन्दर दिखने के कारण वैदिक ज्योतिष मे, राजकुमार की संज्ञा दी गई है, यह एक युवा ग्रह है। यह शुभ फल देने वाला सात्विक ग्रह माना गया है।
सूर्यास्त के ठीक बाद और सूर्योदय के ठीक पहले बुध को देखा जा सकता है। 

बुध के कारण तत्व 

हरा रंग, बुद्धि, वाणी, व्यापार, पन्ना रत्न, ढाक, तोता, विद्या, चतुराई, मामा मित्र, किशोर, हास्य प्रिय, गणित, दाली, सेल्स, ज्योतिष विद्या, कंठ, तंत्रिका तंत्र, स्नायु, कवि, समझदार, लेखक शिक्षक, .स्कैक, कलाकार, नृत्य, तर्क मस्तिष्क, हरे रंग का फल, प्रदर्शक, चित्रकार, सिलाई,नेता, डिजायरनर।

ज्योतिष में बुध 

कालपुरुष की कुंडली में बुध तीसरे और छठवें घर के स्वामी हैं, नक्षत्रों में अश्लेषा, जयेष्ठा और रेवती नक्षत्र के स्वामी हैं। यह उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह शुभ फल देने वाला ग्रह माना गया है, जिसकी कुंडली में बुध अच्छी स्थिति मे हो वह निश्चित ही अपनी वाणी और चातुर्य के दम पर खुब यश और धन अर्जित करता है और भोग विलास से शानदार जिवन जीता  है। 
       कन्या राशि मे उच्च के और मिन मे नीच के होते हैं। लग्न मे बुध जातक को सुन्दर शरीर, स्वर मस्तिष्क, वाक्पटु, कलाकार आदि गुण जन्म जात होता है। अपने तर्कों से किसी को भी जितने का मौका नहीं देते, उनके पास हर सवाल का तात्कालिक जवाब होता है। ये थोड़े अभिमानी भी होते हैं, लेकिन ये लोग अभिमानी ना मानकर विनोदी मान कर चलते हैं। दोस्तों की संख्या ज्यादा और शत्रु ना के बराबर होते हैं, सबको समान दृष्टी से देखते हैं। 
      शुभ ग्रहों की राशि में, शुभ ग्रहो की युति मे, बुध अच्छे फल देने वाले और अशुभ ग्रहों की दृष्टि और युति मे  अशुभ फल देने वाले होते हैं। 

बुध से योग बनने वाला 

भद्र योग - पंचमहापुरुष  में से एक शुभ योग, भद्रयोग.जब बुध देव स्वराशि में हों या फिर उच्च के साथ केंद्र में स्थित हों तो यह योग बनता है। इस योग के बनने से जातक वैभवली, मृदु भाषी, और धनी होता है। 

महालक्ष्मी योग-- जब बुध, गुरु और चंद्र की दृष्टि हो तो यह योग बनता है यह योग से जातक, अपार सफलता प्राप्त कर पाता है, समाज मे अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त कर लेता है।


कमजोर बुध के प्रभाव 

जब जन्म पत्रिका में बुध बलहीन हो जाए तो व्यक्ति की बुद्धिमता धीमी, असफल, व्यापार मे हानि, गणित मे कमजोर, देर से समझ में आना, गरीब, तेजहीन, बुद्धू, आदि कमियाँ दिखाई देने लगती है  ।

बुध दूषित होने का प्रभाव - 

जब जन्म कुंडली मे बुध पापी ग्रह के बुरे प्रभाव में हो, तो जातक को कमजोर होने कुछ प्रभाव दिखाई देंगे उसके साथ स्नायु से संबंधित पीड़ा, भूलने की बीमारी, सुनने में परेशानी, जुबान लड़खड़ाना, अनुचित बातें बोल जाना, चक्कर आना, सर घूमना, गंध में कमी, आदि परेशानी आती है।