भरणी नक्षत्र
नक्षत्रों की कड़ी में भरणी को द्वितीय नक्षत्र है। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। यदि आपका जन्म भरणी नक्षत्र में हुआ है तो आपकी राशि मेष है जिसका स्वामी मंगल है, लेकिन नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस तरह आप पर मंगल और शुक्र का प्रभाव जीवनभर रहेगा। मंगल जहां ऊर्जा, साहस व महत्वाकांक्षा देगा वहीं शुक्र कला, सौंदर्य, धन व सेक्स का कारण बनेगा है। अवकहड़ा चक्र के अनुसार वर्ण क्षत्रिय, वश्य चतुष्पद, योनि गज, महावैर योनि सिंह, गण मानव तथा नाड़ी मध्य हैं।
अश्विनी के पूर्व मे स्थित स्त्री की योनि के आकार मे तीन तारो का समूह भरणी नक्षत्र का प्रतीक है। भरणी चीनी मिट्टी के कलश पात्र को भी कहा जाता है। अतः शंका उत्पन्न होती है कि क्या भरणी नक्षत्र जैसे कि ग्रीक मान्यतानुसार 41 तारो वाला कलश के आकर का होता है। भरणी नाशक राजसिक स्त्री नक्षत्र है। इसकी जाति शूद्र, योनि गज, योनि वैर सिंह, गण मनुष्य, नाड़ी मध्य है। यह पश्चिम दिशा का स्वामी है।
भरणी नक्षत्र के लिए आंवले के वृक्ष को आधार बनाया गया है। इस नक्षत्र में जन्मे जातक के लिए आंवले के वृक्ष की पूजा एवं उसका उपयोग व दान इत्यादि बहुत उपयोगी माना गया है। इस वृक्ष की लकड़ी एवं वृक्ष के फल का उपयोग किसी भी रुप में शुभ फलदायक बनाता है।आंवला से बनी औषधी इत्यादि भी भरणी नक्षत्र के जातक के लिए बहुत फायदेमंद होती है।
मध्याक्ष(मध्य)लोचन नक्षत्र
भरणी नक्षत्र को मध्याक्ष लोचन नक्षत्र की श्रेणी में रखा जाता है। इनमें खोयी हुई वस्तु की जानकारी तो मिल जाती है, पर वस्तु नहीं मिलती।व्यक्ति को वस्तु का साथ मिल नहीं पाता है, वस्तु उसकी पहुंच से दूर हो जाती है।
भरणी नक्षत्र के नामाक्षर
भरणी नक्षत्र मेष राशि के अन्तर्गत आता है।इस नक्षत्र में ली, लू, ले, लो नामाक्षर आते हैं।
भरणी नक्षत्र में जन्म होने से जातक सत्य वक्ता, उत्तम विचार, वचनबद्ध, रोगरहित, धार्मिक कार्यों के प्रति रुचि रखने वाला, साहसी, प्रेरणादायक, चित्रकारी एवं फोटोग्राफी में अभिरुचि रखने वाला होता है। अपना उद्देश्य अंतिम रूप से प्राप्त करने में समर्थ व्यक्ति। 33 साल की उम्र के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होने लगते हैं।
जो व्यक्ति भरणी नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे सुख-सुविधा चाहने वाले होते हैं। इनका जीवन भोग विलास एवं आनन्द में बीतता है। ये देखने में आकर्षक व सुन्दर होते हैं। इनका स्वभाव भी सुन्दर होता है जिससे ये सभी का मन मोह लेते हैं। इनके जीवन में प्रेम ही सबकुछ होता है । इनके हृदय में प्रेम तरंगित होता रहता है ये विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के प्रति आकर्षण एवं लगाव रखते हैं।
भरनी नक्षत्र के जातक ऊर्जा से परिपूर्ण रहते हैं। ये कला के प्रति आकर्षित रहते हैं और संगीत, नृत्य, चित्रकला आदि में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। ये दृढ़ निश्चयी एवं साहसी होते हैं। इस नक्षत्र के जातक जो भी दिल में ठान लेते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। आमतौर पर ये विवाद से दूर रहते हैं फिर अगर विवाद की स्थिति बन ही जाती है तो उसे प्रेम और शान्ति से सुलझाने का प्रयास करते हैं। अगर विरोधी या विपक्षी बातों से नहीं मानता है तो उसे अपनी चतुराई और बुद्धि से पराजित कर देते हैं। ये साफ सफाई और स्वच्छता में विश्वास करते हैं। इनका हृदय कवि के समान होता है। ये किसी विषय में दिमाग से ज्यादा दिल से सोचते हैं। ये नैतिक मूल्यों का आदर करने वाले और सत्य का पालन करने वाले होते हैं। ये रूढ़िवादी नहीं होते हैं और न ही पुराने संस्कारों में बंधकर रहना पसंद करते हें। ये स्वतंत्र प्रकृति के एवं सुधारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले होते हैं। इन्हें झूठा दिखावा व पाखंड पसंद नहीं होता।
इनका व्यक्तित्व दोस्ताना होता है और मित्र के प्रति बहुत ही वफादार होते हैं। ये विषयों को तर्क के आधार पर तौलते हैं जिसके कारण ये एक अच्छे समालोचक होते हैं। इनकी पत्नी गुणवंती और देखने व व्यवहार मे सुन्दर होती हैं। इन्हें समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है।
इस नक्षत्र के जातकों पर मंगल तथा शुक्र दोनों ही ग्रहों का प्रभाव देखने को मिलता है।इस नक्षत्र के व्यक्ति अपनी धुन के पक्के होते हैं। दृढ़ निश्चयी होते हैं।अपनी बात तथा वचन के पक्के होते हैं। अपने सभी कार्यों को पूरी लगन तथा धुन से पूरा करने वाले होते हैं।इन जातकों का स्वास्थ्य सामान्यत: अच्छा ही रहता है।यह जातक सदा सच बोलने वाले होते हैं।यह जीवन में सुखी ही रहते हैं।
भरणी नक्षत्र में जन्मे जातकों की एक विशेषता यह भी है कि यह जिस काम को करने का बीडा़ उठा लेते हैं उस काम को पूरा करके ही दम लेते हैं।यह सभी कार्यों को बडी़ ही कुशलता से सम्पन्न करते हैं. काम को शीघ्र तथा समय पर पूरा करना ही इनक मुख्य गुण है। कई विद्वानों का मत है कि भरणी नक्षत्र के जातक कम खाना खाने वाले होते हैं।यह जातक प्रेम करने में बडे़ ही प्रबल होते हैं। यह आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं. इस नक्षत्र के जातकों का मन मनोविनोद के कार्यों में अधिक लगता है. यह अपने स्वभाव से कुछ बदनाम से होते हैं। इनकी प्रवृति में सफलता पाने की तीव्र इच्छा होती है. यह अधिकाँशत पानी डरते हैं। यह शराब आदि नशीली वस्तुओं के प्रयोग में परहेज नहीं करते हैं।
भरणी नक्षत्र में जन्मे जातक के कार्य
भरणी नक्षत्र एक उग्र (क्रूर) नक्षत्र होता है. ऎसे में इस नक्षत्र में क्रूर कर्म करना सफल होता है. इस नक्षत्र में किसी को मारना, जहर इत्यादि देना, परेशान करना, तंत्र से जुड़े कर्म, तांत्रिक कार्यों में सफलता के लिए भरणी नक्षत्र का चयन बहुत ही उपयोगी होता है। किसी स्थान पर आग लगाना, किसी पर कोर्ट केस करना, कोई कठिन काम करना, अपने विरोधियों को नीचा दिखाने की कोशिश करना उन पर हमला करना, कोई ऎसे काम जिनमें चतुराई से पूर्ण योजनाओं को अमल में लाने की जरूरत हो उस काम के लिए भरणी नक्षत्र का समय अनुकूल माना गया है। भरणी नक्षत्र के देवता यम है ऎसे में यम से संबंधित काम कठोर कर्म में आते हैं। कसाई कर्म के काम भी भरणी नक्षत्र में किए जाना बेहतर होता है।
भरणी नक्षत्र संबंधित व्यवसाय
इस नक्षत्र के अन्तर्गत रक्त बैंक आते हैं। रक्त का परीक्षण करने वाले व्यक्तियों का व्यवसाय इस नक्षत्र के अन्तर्गत आता है। जल्लाद, कसाई, मारपीट करने वाले बदमाश, पुलिस, कस्टम अधिकारी, भूसे वाले अनाज का व्यापार आदि इस नक्षत्र के अन्तर्गत आता है।इस नक्षत्र के जातक जादू के व्यवसाय, मनोरंजन के व्यवसाय, विज्ञान के प्रदर्शनी स्थल, खिलौने बनाने का व्यवसाय, खेल-कूद के सामान से जुडे़ व्यवसाय, बच्चों से संबंधित पुस्तकें तथा शिक्षा संबंधी सामान आदि भरणी नक्षत्र के व्यवसाय माने जाते है।
भरणी नक्षत्र आराधना
भरणी नक्षत्र के बुरे प्रभाव से बचने के लिए जातक अगर इस नक्षत्रे से जुड़े मंत्र, पूजा-पाठ, दान इत्यादि करें तो यह नक्षत्र से जुड़े खराब फलों को रोकने में बहुत प्रभावकारी बनता है।भरणी नक्षत्र के लिए शुक्र ग्रह की शुभ स्थिति प्रभावशाली बनती है।शुक्रवार के दिन इस नक्षत्र के मंत्र जाप करने चाहिए।भरणी नक्षत्र के जातक को भगवान शिव, मां पार्वती, भगवान गणेश का पूजन करना चाहिए।भरणी नक्षत्र के देवता यम देव का पूजन करना चाहिए।
दक्षिण दिशा में यम देव के निमित दीपदान करें।

Social Plugin