पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रतीक दो तारे हैं, जो एक वर्ग के दो किनारों पर स्थित होने से समान दिखाई देते हैं। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस नक्षत्र का लिंग स्त्री हैं तथा इसका शुभ रंग हल्का बादामी है। शुभ अक्षर म और ट है।शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र से संबंधित माना जाता है।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातकों का शारीरिक गठन और व्यक्तित्व विशेषताएं
इस नक्षत्र का जातक आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी होता है। स्थूल शरीर वाला और मिश्रित रंग का होता है। नाक चपटी, मध्यम कद काठी, गोल चेहरा वाला होता है। जातक को पसीना अधिक आता है।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लिए हुए व्यक्ति संगीत और अन्य ललित कलाओं का शौक रखते हैं। वे कला और साहित्य में अच्छी परख भी रखते हैं।इस नक्षत्र के जातक ईमानदारी पूर्वक जीवन जीते हैं।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के जातक प्रेम पूर्ण व्यवहार करते है। संघर्ष और विवादों से दूर रहना पसंद करते हैं। सेवा से जुड़े कार्यों में यह बहुत अच्छे काम करते हैं। यह सपनों में नहीं देते हैं बल्कि व्यवहारिक दृष्टिकोण रखते हैं। यह स्वतंत्र होते हैं और अपनी सहज कल्पनाओं को साकार करना चाहते हैं।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम चरण
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण के स्वामी सूर्य हैं तथा इस नक्षत्र का सूर्य और शुक्र ग्रह का प्रभाव ज्यादा रहता है। यह चरण प्रतिष्ठा और वैभव का प्रतीक है। इस चरण के जातक रसायन या हॉस्पिटल से आजीविका चलाते हैं। इस चरण के जातक का सिर बड़ा, कम बाल, चमकदार आंख, नकली दांत और लंबा पेट होता है। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के जातक जीवन के शुरुआती आयु में सुख भोगने वाले और व्यापार से लाभ कमाने वाले होते हैं।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का द्वितीय चरण
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध है। बुध के प्रभाव के कारण जातक वेद शास्त्रों का ज्ञाता एवं धर्म शास्त्रों का मर्मज्ञ होगा। सूर्य की दशा जातक के लिए स्वास्थ्यवर्धक होगी तथा मंगल की दशा में जातक का भाग्य उदय होगा। बुध की दशा में धन की प्राप्ति के योग बनेंगे।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का तृतीय चरण
इस चरण का स्वामी शुक्र है। लग्नेश सूर्य के साथ शुक्र का संबंध क्रूरता भरा है। क्योंकि शुक्र एक दानवी ग्रह है। फल स्वरूप इस नक्षत्र में जन्मा जातक क्रूर स्वभाव का होगा। सूर्य की दशा जातक के लिए स्वास्थ्यवर्धक होगी। बुध की दशा में धन प्राप्ति का योग बनेगा और मंगल की दशा में भाग्योदय होगा।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का चतुर्थ चरण
इस चरण का स्वामी मंगल है। नक्षत्र स्वामी शुक्र का मंगल शत्रु है। मंगल सूर्य शुक्र भी तेजस्वी ग्रह है। अतः जातक की आयु अधिक नहीं होगी। सूर्य की दशा मध्यम फल देगी और मंगल की दशा में भाग्योदय होगा।
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के जन्मे जातक का पारिवारिक जीवन
जातक का पारिवारिक जीवन शांत व सुखी होगा।जीवनसाथी और बच्चे अच्छे स्वभाव के मिलेंगे और उनसे भरपूर सुख प्राप्त होगा। आपका जीवन साथी कर्तव्यनिष्ठ होगा और अपने परिवार के लिए सब कुछ न्यौछावर करने को तत्पर रहेगा ।जातक प्रेम विवाह भी कर सकते हैं या पूर्व परिचित व्यक्ति से विवाह कर सकते हैं।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातक का स्वास्थ्य
इस नक्षत्र के अंतर्गत मेरुदंड व दिल आता है। और जब भी यह नक्षत्र पीड़ित होता है तब इन दोनों से संबंधित कोई शारीरिक समस्या हो सकती हैं। व्यक्ति को दांत से संबंधित रोग और पेट की समस्याएं प्रभावित कर सकती हैं। मधुमेह का प्रभाव भी इस जातक पर हो सकता है। अस्थमा एवं पीलिया अथवा श्वास की समस्याएं प्रभाव डालते हैं।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातकों का कार्यक्षेत्र
इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक स्वतंत्र होकर कार्य करने का मन रखते हैं। किसी बंधन में बंधकर काम करना इन्हें बिल्कुल भी नहीं भाता। जातक ईमानदारीपूर्वक अपना कार्य करते हैं।कार्यस्थल में चापलूसी के काम नहीं करता और इसी कारण अपने अधिकारियों की कृपा दृष्टि से वंचित रहता है। अवैध कार्यों से दूर रहने वाला होता है। रोजगार के क्षेत्र में प्रायः अपने काम बदलता रहता है।
वैज्ञानिक विषयों एवं लेक्चरर के काम अच्छा करता है। सरकारी कर्मचारी, उच्च अधिकारी, प्रबंधक, राजदूत, स्त्रियों के वस्त्र आभूषण व सौंदर्य प्रसाधन से संबंधित कार्य, मनोरंजन के क्षेत्र में भी काम कर सकते हैं। गायक, अभिनेता, रचनात्मक, कलात्मक क्षेत्रों में भी अच्छा करता है। डॉक्टर, नर्स चिकित्सक, प्राणी विज्ञान, पर्यटन से जुड़े काम इन के लिए अनुकूल हैं।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातकों का नामाक्षर
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण 13:20 से 16:40 तक होता है। इसका अक्षर मो होता है।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का द्वितीय चरण 16:40 से 20:00 तक होता है। इसका अक्षर टा होता है।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का तृतीय चरण 20:00 से 23:20 तक होता है। इसका अक्षर टी होता है।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का चतुर्थ चरण 23:20 से 26:40 तक होता है। इसका अक्षर टू होता है।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातकों के लिए वेद मंत्र
ओम भगप्रणेतर्भगसत्यराधो भगे मां धियमुदवाददन्नः।
भग प्रजाननाय गोभिरश्वैर्भगप्रणेतृभिर्नुवन्तः स्यामः।।
ओम भगाय नमः।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के अन्य तथ्य
तत्व - अग्नि
स्वभाव - उग्र
वश्य - चतुष्पद
गण - मानव
योनि - मूषक
नाड़ी - मध्य
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