पुष्य नक्षत्र  क्या है? 

सत्ताइस नक्षत्रों में पुष्य आठवां नक्षत्र है। इस नक्षत्र के उदय होने पर विवाह को छोड़कर सभी कार्य किए जा सकते हैं । सभी नक्षत्रों में इसे सबसे अच्छा माना जाता है। पुष्य नक्षत्र के दौरान चंद्रमा कर्क राशि में स्थित होता है।  चंद्रमा धन के आगमन का देवता है। इसलिए पुष्य नक्षत्र को धन के लिए अत्यन्त पवित्र माना जाता है। इसलिए सोना, चांदी और नए सामानों की खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र को सबसे पवित्र माना जाता है। इस नक्षत्र में धातु की वस्तुएँ खरीद कर घर लाने से उसे बेचने की नौबत नहीं आती है। सूर्य जुलाई के तीसरे सप्ताह में पुष्य नक्षत्र में गोचर करता है। उस समय यह नक्षत्र पूर्व में उदय होता है। मार्च महीने में रात्रि 9 बजे से 11 बजे तक पुष्य नक्षत्र अपने शिरोबिन्दु पर होता है। पौष मास की पूर्णिमा को चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है। इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है।

आज कल रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अत्यंत दुर्लभ शुभ संयोग माना गया है।  यह नक्षत्र बेहद ही शुभ और सुखद फल देने वाला होता है। इसे सबसे श्रेष्ठ और नक्षत्रों का राजा माना गया है। मान्यता है कि भगवान राम का जन्म भी पुष्य नक्षत्र में ही हुआ था। नक्षत्र हर रोज बदलते रहते हैं और हर दिन बदलने वाले नक्षत्र में पुष्य नक्षत्र भी शामिल है। हर 27वें दिन पुष्य नक्षत्र होता है। इसका नाम उसी आधार पर होता है जिस दिन यह आता है। गुरुवार को आने वाले पुष्य नक्षत्र को गुरु पुष्य कहा जाता है, इसी तरह रवि वार को रवि पुष्य कहा जाता है जो अत्यंत शुभ माना जाता है। 

पुष्य शब्द का अर्थ पोषण करना या पोषण करने वाला होता है। पुष्य ऊर्जा-शक्ति प्रदान करने वाला नक्षत्र है। इस शब्द के ही अनुसार ये नक्षत्र सौभाग्य, समृद्धि और सुख के साथ पोषण करने वाला माना गया है। कुछ वैदिक ज्योतिषियों द्वारा पुष्य को तिष्य नक्षत्र भी कहा गया है। तिष्य शब्द का अर्थ है शुभ होना तथा यह अर्थ भी पुष्य नक्षत्र को शुभता ही प्रदान करता है। 

बृहस्पति और शनि के सम्मिलित गुण

पुष्य को नक्षत्रों का राजा भी कहते हैं। माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र की साक्षी से किए गए कार्य हमेशा सफल होते हैं। पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि व अधिष्ठाता बृहस्पति देव हैं। शनि के प्रभाव से इस नक्षत्र का स्वभाव स्थायी या लंबे समय तक होता है। इसलिए पुष्य नक्षत्र में खरीदी हुई वस्तु शनि के प्रभाव के कारण स्थाई रूप से बनी रहती है और बृहस्पति देव के कारण वह समृद्धिदायी होती है। शास्त्रों में गुरु को पद-प्रतिष्ठा, सफलता और ऐश्वर्य का कारक माना गया है और शनि को वर्चस्व , न्याय एवं श्रम का कारक माना गया है, इसीलिए पुष्य नक्षत्र की उपस्थिति में महत्वपूर्ण कार्य करने को शुभ माना जाता है।  

पुष्य नक्षत्र में क्या काम करना शुभ होता है 

पुष्य नक्षत्र खरीददारी के लिए उत्तम माना गया है। इस दौरान वाहन, जमीन या घर खरीदना बेहद लाभकारी माना जाता है। पुष्य नक्षत्र में किए गए काम दोषमुक्त होते हैं और जल्दी ही सफल हो जाते हैं। पुष्य नक्षत्र रविवार या गुरुवार को पड़े तो यह बेहद शुभदायक माना जाता है। इस शुभ संयोग को रवि पुष्य और गुरु पुष्य कहा जाता है।

पुष्य एक अन्ध नक्षत्र है। पुष्य-नक्षत्र में खोई हुई वस्तु शीघ्र प्राप्त हो जाती है।पुष्य नक्षत्र को शुभ तो माना ही जाता है लेकिन इसको थोड़ा अशुभ भी माना जाता है। जब पुष्य नक्षत्र शुक्रवार के दिन आता है तब यहृ उत्पात व बाधाकारक होता है। विवाह में भी पुष्य नक्षत्र को अशुभ माना गया है। विवाह लग्न के लिए पुष्य नक्षत्र अशुभ माना जाता है।यदि कोई पुष्य नक्षत्र के योग में स्वर्ण आभूषण खरीदता है तो उसे इन चीजों से स्थाई लाभ प्राप्त होता है। इनसे प्राप्त धन  निरन्तर बढता है। 

पुष्य नक्षत्र में यदि आप किसी कंपनी के शेयर में निवेश करना चाहते हैं तो यह भी फायदेमंद हो सकता है। निवेश से पूर्व संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करना चाहिए।इस काल में जो वस्तुएं खरीदी जाती हैं, उससे हमारे परिवार को भी लाभ होता है। खरीदने वाले व्यक्ति के परिवार को भी विशेष सुविधा और शुभ फल प्रदान करती है।

यदि पुष्य नक्षत्र में वाहन खरीदते हैं तो उस वाहन से दुर्घटना की संभावनाएं कम रहती हैं। साथ ही, वाहन से दुर्घटना के योग टल भी सकते हैं। वाहन चलाते समय हमें स्वयं भी पूरी सावधानी रखनी चाहिए, यातायात के नियमों का पालन करना चाहिए।व्यापारियों के लिए यह दिन काफी फायदेमंद रहता है। इस दिन बही-खाते खरीदने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र में बही-खाते खरीदने पर व्यापार में मुनाफा अधिक होता है और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

पुष्य नक्षत्र में सफेद रंग की वस्तुएं जैसे चावल, शकर आदि में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। निवेश से पूर्व सावधानी रखना जरूरी है।पुष्य नक्षत्र में दूध का दान करने पर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। धन संबंधी समस्याओं का निराकरण होता है।यदि कोई पुष्य नक्षत्र में व्यापार के लिए वाहन खरीदता है तो उसे व्यापार में लाभ प्राप्त हो सकता है। यह वाहन व्यापार की उन्नति में मददगार साबित हो सकता है।

पुष्य नक्षत्र के नामाक्षर

पुष्य नक्षत्र के प्रथम चरण या प्रथम पाद में जो 03:20 से 06:40 तक होता है। इसका अक्षर “हू” होता है, इस चरण में जन्म लेने वाले व्यक्ति का नाम " हू " से रखना चाहिए। 

पुष्य नक्षत्र के दूसरे चरण या द्वितीय पाद में जो 06:40 से 10:00 तक होता है। इसका अक्षर “हे” होता है, इस चरण में जन्म लेने वाले व्यक्ति का नाम "हे" से शुरू होना चाहिए। 

पुष्य नक्षत्र के तीसरे चरण या तृतीय पाद में जो 10:00 से 13:20 तक होता है। इसका अक्षर “हो” होता है, इस चरण में जन्म लेने वाले व्यक्ति का नाम "हो" से रखना चाहिए। 

पुष्य नक्षत्र के चौथे चरण या चतुर्थ पाद में जो 13:20 से 16:40 तक होता है। इसका अक्षर “डा” होता है, इस चरण में जन्म लेने वाले व्यक्ति का नाम "डा " से रखना चाहिए। 

पुष्य नक्षत्र वेद मंत्र एवं अराधना 

ॐ बृहस्पते अतियदर्यौ अर्हाद दुमद्विभाति क्रतमज्जनेषु ।

यददीदयच्छवस ॠतप्रजात तदस्मासु द्रविण धेहि चित्रम ।


ॐ बृहस्पतये नम: ।


 पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक का स्वभाव 

पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग सर्वगुण संपन्न, भाग्यशाली तथा विशेष होते हैं। दिखने में यह सुंदर, स्वस्थ, सामान्य कद-काठी के तथा चरित्र में विद्वान, चपल, स्त्रीप्रिय व बोल-चाल में चतुर होते हैं। इस नक्षत्र में जन्में लोग जनप्रिय और नियम पर चलने वाले होते हैं तथा खनिज पदार्थ, पेट्रोल, कोयला, धातु, पात्र, खनन संबंधी कार्य, कुएं, ट्यूबवेल, जलाशय, समुद्र यात्रा, पेय पदार्थ आदि में क्षेत्रों में सफलता हासिल करते हैं।

यदि आपका जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ है तो आपमें नित नए काम करने की प्रवृत्ति बनी रहेगी। हर बार नए काम की खोज और परिवर्तन आपसे अधिक परिश्रम भी कराता है। कठिन परिश्रम करने पर भी आपको सफलता आसानी से नहीं मिलेगी और फल प्राप्ति में अक्सर देरी हो जाती है। परन्तु आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपकी बुद्धि बहुत तेज़ है और आगे बढ़ने के रास्ते भी खोज लेती है। अधिक भावुकता के कारण आप एक अच्छे और सच्चे प्रेमी होते हैं। किसी भी सम्बन्ध को बीच में छोड़ना आपकी प्रकृति में नहीं है। आप किसी से प्रेम करेंगे तो पूरे तन मन धन से उसके हो जायेंगे। इसी प्रकार आप दोस्ती भी निभाएंगे। मित्रों को सहयोग देने में आप कभी पीछे नहीं हटते और न हे अपने स्वार्थ की चिंता करते हैं ।आप स्वभाव से चंचल हैं। जलप्रिय होने के कारण आपको तैरना बहुत पसंद है। चन्द्रमा की चाँदनी आपको बहुत अधिक आकर्षित करती है। कल्पनाशील होने के कारण आप एक अच्छे लेखक , सुन्दर कवी, महान दार्शनिक एवं उच्च कोटि के साहित्यकार एवं भविष्यवक्ता भी हो सकते हैं। आप मन से शांत एवं धार्मिक स्वभाव के होते हैं। अपने क्षेत्र के पंडित एवं विद्वान् होने के साथ साथ भाग्यशाली और धनि भी होते हैं। पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है परन्तु इसके गुण गुरु तुल्य बताये गये है. इश्वर में पूर्ण आस्था , भाई बहनों से स्नेहपूर्ण सम्बन्ध एवं अपने से बड़ो का आदर सम्मान आपके स्वभाव में है। 

पुष्य नक्षत्र में जन्मी महिलाएं भी बहुत धार्मिक विचारों वाली होती हैं। हर प्रकार के कार्यों में रूचि दिखाना इनके स्वभाव में हे होता है। यह विशाल ह्रदय वाली तथा दयाभाव रखने वाली होती हैं।